जापानी बाजार के बूम के समय टोक्यो में इम्पीरियल पैलेस का अनुमानित बाजार मूल्य कैलिफ़ोर्निया के पूरे रियल एस्टेट से ज़्यादा था.
Friday, March 31, 2017
Thursday, March 30, 2017
किताब के विषय में कुछ शब्द
पाँच शताब्दियों और चार महाद्वीपों की घटनाएं; निवेश के नए माध्यम हो या इक्विटी से लेकर स्थिर आमदनी, डेरिवेटिव्स, रियल एस्टेट ... सांस थाम कर रखिये .... तुलिप बल्ब्स.
राइडिंग द रोलर कोस्टर - वे सबक जो बाजार हमें सिखाते हैं, लेकिन अक्सर हम भूल जाते हैं.
राइडिंग द रोलर कोस्टर - वे सबक जो बाजार हमें सिखाते हैं, लेकिन अक्सर हम भूल जाते हैं.
सीट-बेल्ट
वित्तीय बाजार की अगली रोलर कोस्टर राइड पर जाने से पहले "सीट-बेल्ट" में यह किताब आपके लिए उपयोगी साबित होगी. आप इस सदाबहार पुस्तक को बार-बार पढ़ना चाहेंगे ताकि वित्तीय बाज़ारों के भूले हुए सबक फिर से याद आ जाएँ.
Wednesday, March 29, 2017
Tuesday, March 28, 2017
Extraordinary Popular Delusions and the Madness of Crowds
"जनता कितनी आसानी से गुमराह हो जाती है?" - चार्ल्स मैके 1841 में छपी अपनी किताब "Extraordinary Popular Delusions and the Madness of Crowds" में लिखते है.
Monday, March 27, 2017
यह दौर भी बीत जायेगा
राजा सोलोमन ने सपने में एक अंगूठी देखी और दुख के आवेग में अपने सलाहकारों को उसे ढूंढ लाने के लिए कहा.
"जब मैं संतुष्टि का अनुभव करता हूँ तो मुझे दर लगता है की यह दिन नहीं रहेंगे. और जब मैं संतुष्ट नहीं होता हूँ तो मुझे भय लगता है की मेरी तकलीफें सदा कायम रहेंगी. मुझे वह अंगूठी लाकर दो जिससे मेरा दुख दूर हो जाएगा." ऐसी मांग राजा ने रखी.
सोलोमन ने अपने सभी सलाहकारों को बाहर भेज दिया और फिर उनमे से एक सलाहकार जाकर एक बुज़ुर्ग सोनार से मिला जिसने एक सोने के कंगन पर उकेरा "यह दौर भी बीत जायेगा". जब राजा को अपनी अंगूठी मिली और उसने उस पर उकेरा गया वाक्य पढ़ा तो उसकी वेदना आनंद में परिवर्तित हो गई और आनंद दुख में, और उसके बाद वह समभाव में रहने लगा.
अब देखिये की ऐसा महान राजा भी खुद को संतुष्ट रखने में असमर्थ था. ख़ुशी होने पर वह दुख महसूस करता था. ख़ुशी होने पर वह दुख महसूस करता था, और जब दुखी होता था तो वह दुख महसूस नहीं करता था, क्योंकि वह आगे की राह देखने में असमर्थ था. इस कंगन ने उसके दुख को निष्क्रिय करने में भूमिका निभाई. लगातार कुछ न कुछ आस लगाए रखने के प्रयास में संतुष्ट रहने लगा. पहले वह सोचता था कि संतुष्टि केवल ऊपरी अनुभूति है जो उसकी विपुल संपत्ति से आयी थी, और जो अस्थायी थी, ऐसी स्थिति में उसकी संतुष्टि का भाव हमेशा के लिए नहीं रह सकता था. वास्तविक संतोष तो तभी मिल सकता है जब उसने अपनी संपत्ति के असली हेतु को पहचान.
स्रोत: अनजान
"जब मैं संतुष्टि का अनुभव करता हूँ तो मुझे दर लगता है की यह दिन नहीं रहेंगे. और जब मैं संतुष्ट नहीं होता हूँ तो मुझे भय लगता है की मेरी तकलीफें सदा कायम रहेंगी. मुझे वह अंगूठी लाकर दो जिससे मेरा दुख दूर हो जाएगा." ऐसी मांग राजा ने रखी.
सोलोमन ने अपने सभी सलाहकारों को बाहर भेज दिया और फिर उनमे से एक सलाहकार जाकर एक बुज़ुर्ग सोनार से मिला जिसने एक सोने के कंगन पर उकेरा "यह दौर भी बीत जायेगा". जब राजा को अपनी अंगूठी मिली और उसने उस पर उकेरा गया वाक्य पढ़ा तो उसकी वेदना आनंद में परिवर्तित हो गई और आनंद दुख में, और उसके बाद वह समभाव में रहने लगा.
अब देखिये की ऐसा महान राजा भी खुद को संतुष्ट रखने में असमर्थ था. ख़ुशी होने पर वह दुख महसूस करता था. ख़ुशी होने पर वह दुख महसूस करता था, और जब दुखी होता था तो वह दुख महसूस नहीं करता था, क्योंकि वह आगे की राह देखने में असमर्थ था. इस कंगन ने उसके दुख को निष्क्रिय करने में भूमिका निभाई. लगातार कुछ न कुछ आस लगाए रखने के प्रयास में संतुष्ट रहने लगा. पहले वह सोचता था कि संतुष्टि केवल ऊपरी अनुभूति है जो उसकी विपुल संपत्ति से आयी थी, और जो अस्थायी थी, ऐसी स्थिति में उसकी संतुष्टि का भाव हमेशा के लिए नहीं रह सकता था. वास्तविक संतोष तो तभी मिल सकता है जब उसने अपनी संपत्ति के असली हेतु को पहचान.
स्रोत: अनजान
Saturday, March 25, 2017
आशा, भय और लालच
बेंजामिन ग्रैहम की बात याद कीजिये: "सामान्य स्टॉक्स अधिकतर दोनों दिशाओं में कीमतों में तर्कहीन और अत्याधिक परिवर्तन होते हैं जो की अधिकांश लोगों की स्वभावगत सट्टा-प्रवृत्ति का परिणाम होते हैं ... इससे आशा, भय और लालच को बल मिलता है.
Tuesday, March 21, 2017
Sunday, March 19, 2017
डॉ. उमा शशिकान्त द्वारा लिखी गई प्रस्तावना के कुछ अंश
आप चाहे शौकिया निवेशक हो या वित्तीय बाजार के पुराने खिलाडी, आप इस किताब को दिलचस्प और उपयोगी पाएंगे. इस किताब को पढ़ने की सलाह देते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है.
Saturday, March 18, 2017
किताब पढने के कुछ कारण
पांच शताब्दियों और चार महाद्वीपों की घटनाएं; निवेश के नए माध्यम हो या इक्विटी से लेकर स्थिर आमदनी, डेरिवेटिव्ज, रियल एस्टेट। .... सांस थाम कर रखिये। ... ट्यूलिप बल्ब!
इन घटनाओं के समय बाजार की कीमतों में खूब उठा-पटक होती है. ऐसी स्थिति से किस तरह ठीक से निपटा जा सकता था, इसको लेकर कई सिद्धांत दिए जाते हैं. लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती है? क्या इनका पहले से अनुमान लगाना संभव है? क्या हम इनके लिए पहले से तयारी कर सकते हैं?
जब बाजार में सुनामी आती है तोह छोटे और बड़े, सभी निवेशकों को नुक्सान उठाना पड़ता है. सर्कार और नियामक हस्तक्षेप की कोशिश करते हैं लेकिन वे उपाय बहुत देर से आते हैं और नाकाफ़ी साबित होते हैं. सुनामी से नुकसान होने के बाद किसे उसके लिए दोषी ठहराया जाए, बड़े-बड़े देश भी यह तय नहीं कर पाते हैं.
ऐसी स्थिति में निवेशक क्या करें? वे इससे क्या सीख सकते हैं?
रोचक विवरण प्रस्तुति करती 'राइडिंग द रोलर कोस्टर' इस विषय पर कांकरी और विवेचना से परिपूर्ण है, इसके बावजूद बेहद सरल और रोचक शैली में लिखी गयी है. यह सामान्य निवेशकों से बात करती है, उन्हें कहानियां सुनाती है और अपनी रोचक शैली में सावचेत करती हुई ज़रूरी सलाह भी देती है.
वित्तीय बाजार की अगली रोलर-कोस्टर राइड पर जाने से पहले "सीट-बेल्ट" के रूप में यह किताब आपके लिए उपयोगी साबित होगी. आप इस सदाबहार पुस्तक को बार-बार पढ़ना चाहेंगे ताकि वित्तीय बाज़ारों के भूले हुए सबक फिर से याद आ जाएँ.
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